Best Aradhana poems of Suryakant Tripathi Nirala DAS SUSMITA February 20, 2022February 20, 2022 कविता 0 Comments मरा हूँ हजार मरण –सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला मरा हूँ हजार मरणपाई तब चरण-शरण । फैला जो तिमिर जालकट-कटकर रहा काल,आँसुओं के अंशुमाल,पड़े अमित सिताभरण । जल-कलकल-नाद बढ़ाअन्तर्हित हर्ष कढ़ा,विश्व उसी को उमड़ा,हुए चारु-करण सरण । Facebook Twitter WhatsApp Email Messenger Pinterest Pages: 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18
Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi २. यक-ब-यक शोरिशे-फुगाँ की तरह -फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ यक-ब-यक शोरिशे-फुगाँ…