Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi
१५ . शाम
इस तरह है कि हर इक पेड़ कोई मन्दिर है
कोई उजड़ा हुआ, बे-नूर पुराना मन्दिर
ढूंढता है जो ख़राबी के बहाने कब से
चाक हर बाम, हर इक दर का दम-ए-आख़िर है
आसमां कोई पुरोहित है जो हर बाम तले
जिसम पर राख मले, माथे पे सिन्दूर मले
सरनिगूं बैठा है चुपचाप न जाने कब से
इस तरह है कि पसे-परदा कोई साहिर है
जिसने आफ़ाक पे फैलाया है यूं सहर का दाम
दामन-ए-वकत से पैवसत है यूं दामन-ए-शाम
अब कभी शाम बुझेगी न अंधेरा होगा
अब कभी रात ढलेगी न सवेरा होगा
आसमां आस लिये है कि यह जादू टूटे
चुप की ज़ंजीर कटे, वकत का दामन छूटे
दे कोई शंख दुहाई, कोई पायल बोले
कोई बुत जागे, कोई सांवली घूंघट खोले
(सरनिगूं=सिर झुका कर, साहिर=जादूगर,
सहर=जादू)
