Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi
२१ . पास रहो
तुम मेरे पास रहो
मेरे कातिल, मेरे दिलदार, मेरे पास रहो
जिस घड़ी रात चले
आसमानों का लहू पी के सियह रात चले
मरहम-ए-मुशक लिये नशतर-ए-अलमास लिये
बैन करती हुई, हंसती हुई, गाती निकले
दर्द की कासनी पाज़ेब बजाती निकले
जिस घड़ी सीनों में डूबे हुए दिल
आसतीनों में निहां हाथों की रह तकने लगें
आस लिये
और बच्चों के बिलखने की तरह कुलकुले-मय
बहरे-नासूदगी मचले तो मनाये न मने
जब कोई बात बनाये न बने
जब न कोई बात चले
जिस घड़ी रात चले
जिस घड़ी मातमी सुनसान, सियह रात चले
पास रहो
मेरे कातिल, मेरे दिलदार, मेरे पास रहो
(मरहम-ए-मुशक=कस्तूरी का लेप,
अलमास=हीरा, निहां=छिपे हुए, बहरे-
नासूदगी =असंतोष का सागर)
