Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi
२. यक-ब-यक शोरिशे-फुगाँ की तरह
यक-ब-यक शोरिशे-फुगाँ की तरह
फ़स्ले-गुल आई इम्तहाँ की तरह
सहने-गुलशन में बहरे-मुश्ताकां
हर रविश खिंच गई कमां की तरह
फिर लहू से हर एक कासा-ए-दाग़
पुर हुआ जामे-अर्गवाँ की तरह
याद आया जुनूने-गुमगश्ता
बे-तलब कर्जे-दोस्ताँ की तरह
जाने किस पर हो मेहरबां क़ातिल
बे-सबब मर्गे-नागहाँ की तरह
हर सदा पर लगे हैं कान यहाँ
दिल संभाले रहो जुबां की तरह
(शोरिशे-फुगाँ=रोने की आवाज़,
बहरे-मुश्ताकां=चाहवानों के लिए,
कासा-ए-दाग़ =ज़ख़्म का कटोरा,
अरग़वां=लाल, जुनूने-गुमगश्ता=
गुम हुआ जुनून, बे-तलब=जो माँगा
न जाये, मर्गे-नागहाँ=अचानक मौत)
