Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi
२०. दो मर्सिए
१. मुलाकात मिरी
सारी दीवार सियह हो गई ता हलका-ए-बाम
रासते बुझ गये, रुख़सत हुए रहगीर तमाम
अपनी तनहाई से गोया हुई फिर रात मिरी
हो न हो आज फिर आई है मुलाकात मिरी
इक हथेली पे हिना, इक हथेली पे लहू
इक नज़र ज़हर लिये, एक नज़र में दारू
देर से मंज़िल-ए-दिल में कोई आया न गया
फ़ुरकत-ए-दर्द में बे-आब हुआ तख़ता-ए-दाग़
किससे कहिये कि भरे रंग से ज़ख़मों के अयाग़
और फिर ख़ुद ही चली आई मुलाकात मिरी
आशना मौत जो दुश्मन भी है ग़मख़्वार भी
वो जो हम लोगों की कातिल भी है दिलदार भी
२. ख़तम हुई बारिश-ए-संग
नागहां आज मेरे तारे-नज़र से कटकर
टुकड़े-टुकड़े हुए आफ़ाक पे खुरशीद-ओ-कमर
अब किसी सिमत अंधेरा न उजाला होगा
बुझ गई दिल की तरह राह-ए-वफ़ा मेरे बाद
दोस्तो, काफ़िला-ए-दर्द का अब क्या होगा
अब कोई और करे परवरिश-ए-गुलशन-ए-ग़म
दोस्तो, ख़तम हुई दीदा-ए-तर की शबनम
थम गया शोर-ए-जुनूं, ख़तम हुई बारिश-ए-संग
ख़ाक-ए-रह आज लिये है लब-ए-दिलदार का रंग
कू-ए-जानां में खुला मेरे लहू का परचम
देखिये, देते हैं किस-किस को सदा मेरे बाद
“कौन होता है हरीफ़-ए-मये-मरद अफ़गने-इश्क
है मुकररर लब-ए-साकी पे सला मेरे बाद”
(अयाग़=जाम, आशना=दोस्त, नागहां=अचानक,
आफ़ाक=आकाश, खुरशीद-ओ-कमर=सूरज और चाँद,
परचम=झंडा, सला =पुकार)
