Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi
५. कब ठहरेगा दर्द-ए-दिल, कब रात बसर होगी
कब ठहरेगा दर्द-ए-दिल, कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आयेंगे, सुनते थे सहर होगी
कब जान लहू होगी, कब अश्क गुहर होगा
किस दिन तेरी शनवाई ऐ दीदा-ए-तर होगी
कब महकेगी फ़स्ल-ए-गुल, कब बहकेगा मयखाना
कब सुब्हे-सुख़न होगी, कब शाम-ए-नज़र होगी
वाइज़ है न ज़ाहिद है, नासेह है न क़ातिल है
अब शहर में यारों की किस तरह बसर होगी
कब तक अभी रह देखें ऐ क़ामते-ज़ानाना
कब हश्र मुअय्यन है तुझको तो ख़बर होगी
(गुहर=मोती, शनवाई=सुनवाई, वाइज़=धर्म-
प्रचारक, ज़ाहिद=संयमी, क़ामते-ज़ानाना=प्रेमिका
का शरीर, मुअय्यन=निशचित)
