Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi
७. शरहे-फ़िराक़ मदहे-लबे-मुश्कबू करें
शरहे-फ़िराक, मदहे-लबे-मुशकबू करें
गुरबतकदे में किससे तिरी गुफ़्तगू करें
यार-आशना नहीं कोई टकरायें किससे जाम
किस दिलरुबा के नाम पे ख़ाली सुबू करें
सीने पे हाथ है न नज़र को तलाशे-बाम
दिल साथ दे तो आज ग़में-आरज़ू करें
कब तक सुनेगी रात, कहां तक सुनायें हम
शिकवे गिले सब आज तिरे रू-ब-रू करें
हमदम, हदीसे-कू-ए-मलामत सुनाईयो
दिल को लहू करें कि गरेबां रफ़ू करें
आशुफ़तासर हैं, मुहतसिबो मूंह न आईयो
सर बेच दें तो फ़िकरे-दिलो-जां अदू करें
“तरदामनी पे शैख़, हमारी न जाईयो
दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें”
(शरहे-फ़िराक=बिरहा की व्याख्या, मदहे-
लबे-मुशकबू=सुगंधित होंठों की बढ़ाई,
गुरबतकदे=प्रदेश, यार-आशना=यार का
जानकार, सुबू=शराब का बर्तन, हदीसे-कू-
ए-मलामत=निंदा की गली की चर्चा,
आशुफ़तासर=सिरफिरे, मुहतसिब=रोक
लगाने वाले, अदू=दुश्मन, तरदामनी=
गुनाहों की निशानी)
