Best 25+ Faiz Ahmed Faiz ghazals in Hindi
४. जमेगी कैसे बिसाते-याराँ के शीशा-ओ-जाम बुझ गये हैं
जमेगी कैसे बिसाते-याराँ कि शीशा-ओ-जाम बुझ गये हैं
सजेगी कैसे शबे-निगाराँ कि दिल सरे-शाम बुझ गये हैं
वो तीरगी है रहे-बुतां में चिरागे-रुख़ है न शम्मे-वादा
किरण कोई आरज़ू की लाओ कि सब दरो-बाम बुझ गये हैं
बहुत संभाला वफ़ा का पैमां मगर वो बरसी है अबके बरखा
हर एक इकरार मिट गया है, तमाम पैग़ाम बुझ गये हैं
करीब आ ऐ महे-शबे-ग़म नज़र पे खुलता नहीं कुछ इस दम
कि दिल पे किस-किसका नक़्श बाकी है कौन से नाम बुझ गये हैं
बहार अब आके क्या करेगी कि जिनसे था जश्ने-रंगों-नग़मा
वो गुल सरे-शाख़ जल गये हैं, वो दिल तहे-दाम बुझ गये हैं
(शबे-निगाराँ=प्रेमकियों की रात, तीरग़ी=अंधेरा)
